1. खून का शुद्धीकरण
किडनी निरंतर कार्यरत रहकर शरीर में बनते अनावश्यक जहरीले पदार्थों को पेशाब द्वारा बाहर निकालती है।
2. अपशिष्ट उत्पादों को निकलना
अपशिष्ट उत्पादों को हटाकर रक्त की शुद्धि करना किडनी का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। हमारे द्वारा जो भोजन लिया जाता है उसमें प्रोटीन होता है। यह प्रोटीन शरीर को आरोग्य रखने और शरीर के विकास के लिए आवश्यक है। प्रोटीन का शरीर द्वारा उपयोग किया जाता है किन्तु इस प्रक्रिया में कुछ अपशिष्ट पदार्थों का उत्पादन होता है। इन अपशिष्ट पदार्थों का संचय हमारे शरीर के अंदर जहर को बनाए रखने के समान है। हमारी किडनी, रक्त से विषाक्त अपशिष्ट उत्पादों को छानकर उसे शुद्ध करती हैं। ये विषाक्त पदार्थ अंततः पेशाब से विसर्जित हो जाते हैं।
क्रीएटिनिन और यूरिया दो महत्वपूर्ण अपशिष्ट उत्पाद हैं। रक्त में इनकी मात्रा का अवलोकन, किडनी की कार्यक्षमता को दर्शाता है। जब दोनों किडनी खराब हो जाती हैं, तो क्रीएटिनिन और यूरिया की मात्रा रक्त परीक्षण में उच्च स्तर पर पहुँच जाते हैं।
3. शरीर में पानी का संतुलन
किडनी शरीर के लिए जरूरी पानी की मात्रा को रखते हुए अधिक जमा हुए पानी को पेशाब द्वारा बहार निकालती है।
जब किडनी ख़राब हो जाती हैं तो वे इस अतिरिक्त पानी को शरीर से बाहर करने की क्षमता को खो देती हैं, शरीर में अतिरिक्त पानी एकत्रित होने के कारण शरीर में सूजन हो जाती है।
4. अम्ल एवं क्षार का संतुलन
किडनी शरीर में सोडियम, पोटैशियम, क्लोराइड, मैग्नेशियम, फॉस्फोरस, बाइकार्बोनेट वगैरह की मात्रा यथावत रखने का कार्य करती है। उपरोक्त पदार्थ ही शरीर में अम्ल एवं क्षार की मात्रा के लिए जिम्मेदार होते हैं। सोडियम की मात्रा बढ़ने या घटने से दिमाग पर और पोटैशियम की मात्रा बढ़ने या कम होने से हृदय और स्नायु की गतिविधियों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
कैलशियम और फॉस्फोरस को उचित रखना और उनके स्तर को सामान्य रखना हमारे शरीर में स्वस्थ हडिड्यों और स्वस्थ दांतों के लिए अति आवश्यक है।
5. खून के दबाव पर नियंत्रण
किडनी कई हार्मोन बनाती है जैसे एंजियोटेन्सीन, एल्डोस्टोरोन, प्रोस्टाग्लेन्डिन इत्यादि। इन हार्मोनों की सहायता से शरीर में पानी की मात्रा, अम्लों एवं क्षारों के संतुलन को बनाए रखती है। इस संतुलन की मदद से किडनी शरीर में खून के दबाव को सामान्य बनाये रखने का कार्य करती है।किडनी की खराबी होने पर होर्मोन के उत्पादन एवं नमक और पानी के संतुलन में गड़बड़ी से उच्च रक्तचाप हो जाता है।
6. रक्तकणों के उत्पादन में सहायता
खून में उपस्थित लाल रक्तकणों का उत्पादन एरिथ्रोपोएटीन की मदद से अस्थिमज्जा में होता है। एरिथ्रोपोएटीन किडनी में बनता है किडनी के फेल होने की स्थिति में यह पदार्थ कम या बिल्कुल ही बनना बंद हो जाता है, जिससे लाल रक्तकणों का उत्पादन कम हो जाता है और खून में फीकापन आ जाता है, जिसे एनीमिया (खून की कमी का रोग) कहते हैं।
7. हडिड्यों की मजबूती
स्वस्थ हडिड्यों को बनाए रखने के लिए किडनी, विटामिन डी को सक्रिय रूप में परिवर्तित करती है जो भोजन से कैल्सियम के अवशोषण, हडिड्यों और दांतों के विकास और हडिड्यों को मजबूत और स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक होता है।

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